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जन्मदिन था या राजनीतिक 'मिलन समारोह'? आबूरोड की सियासत में उठे सवाल*

By Goapl Gupta · 16 Jun 2026 · 11 views
*जन्मदिन था या राजनीतिक 'मिलन समारोह'? आबूरोड की सियासत में उठे सवाल*

*आबूरोड।* पूर्व पीसीसी सदस्य एवं कांग्रेस से निर्वाचित पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अश्विन गर्ग का 50वां जन्मदिन समारोह अब केवल निजी आयोजन नहीं रहा। यह शहर की राजनीति में चर्चा, अटकलों और व्यंग्य का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

कांग्रेस के दिग्गज नेता के जन्मदिन पर जो तस्वीर सामने आई, उसने राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। समारोह में राजस्थान सरकार के मंत्री ओटाराम देवासी, भाजपा जिला अध्यक्ष, पूर्व जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री, युवा मोर्चा अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेता मौजूद रहे। माहौल ऐसा था मानो भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता का सम्मान समारोह हो।

*कांग्रेस के प्रमुख चेहरे रहे नदारद*
दूसरी तरफ कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे समारोह से नदारद रहे। स्थानीय विधायक, जिला अध्यक्ष, नगर कांग्रेस अध्यक्ष और अश्विन गर्ग के राजनीतिक संरक्षक माने जाने वाले संयम लोढ़ा की अनुपस्थिति ने सियासी गलियारों में कानाफूसी तेज कर दी।

शहर में चर्चा है कि "जन्मदिन कांग्रेस नेता का था, लेकिन अतिथियों की सूची देखकर लगा कि शायद भाजपा का जिला कार्यसमिति सम्मेलन चल रहा है।"

*भाजपा नेताओं की मौजूदगी पर सवाल*
सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा आकर्षण था कि भाजपा के इतने बड़े नेता एक निजी जन्मदिन समारोह में पहुंच गए, जबकि कांग्रेस के कई नेता दूरी बनाए रहे। क्या यह केवल सामाजिक सौहार्द था या स्थानीय राजनीति में नए अध्याय की तैयारी?

लोग व्यंग्य कर रहे हैं कि "तस्वीरों से पार्टी का अनुमान लगाया जाए तो कोई भी गलती कर सकता है कि जन्मदिन मनाने वाले नेता कांग्रेस के हैं या भाजपा के।"

*कार्यकर्ताओं में असमंजस*
सबसे ज्यादा असहज स्थिति उन भाजपा कार्यकर्ताओं की बताई जा रही है जो वर्षों से कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव में कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे के कट्टर विरोधी बन जाते हैं, लेकिन निजी आयोजनों में वही नेता इतने आत्मीय दिखते हैं कि कार्यकर्ता तय नहीं कर पाता कि उसका राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कौन है।

*क्या बदल रहे समीकरण?*
शहर में सवाल तैर रहा है कि क्या अश्विन गर्ग का अपने पुराने राजनीतिक खेमे से मोहभंग हो रहा है? क्या संयम लोढ़ा और अश्विन गर्ग के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही? या फिर भाजपा नेताओं की मौजूदगी भविष्य के किसी नए राजनीतिक समीकरण का संकेत है?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजनीति में कोई भी तस्वीर केवल तस्वीर नहीं होती, हर तस्वीर एक संदेश भी होती है। अश्विन गर्ग के जन्मदिन की तस्वीरों ने जितने संदेश दिए हैं, उतने शायद किसी राजनीतिक सभा ने भी नहीं दिए।

फिलहाल आबूरोड में यही चर्चा है— "केक जन्मदिन का था, लेकिन चर्चा राजनीति की हो रही है।"

और सबसे बड़ा सवाल अभी भी बरकरार है— *क्या यह सिर्फ जन्मदिन था, या आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक रिश्तों की नई पटकथा का ट्रेलर?*

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